Operation AMG Movie Review; सच्ची घटना पर आधारित एक प्रेरणादायक कहानी क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए

भारतीय सिनेमा में पिछले कुछ वर्षों से सच्ची घटनाओं पर देशभक्ति पर आधारित फिल्मों का चलन बड़ा है इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण नाम जुड़ गया है ऑपरेशन AMG यह फिल्म रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान फंसे भारतीय छात्रों को वापस लाने के भारत सरकार के साहसी मिशन पर आधारित है ध्रुव लाठर द्वारा निर्देशित यह फिल्म ने केवल युद्ध की अभीषिका को दिखाती है बल्कि यह भी दर्शाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भारत अपने नागरिकों के लिए किस हद तक जा सकता है अपने अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत ने बहुत योगदान दिया है
फिल्म की कहानी Plot Summary
फिल्म की शुरुआत यूक्रेन के संत और वकील हादसा से होती है जहां हजारों भारतीय छात्र अपना भविष्य बनाने के लिए मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं अचानक रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चढ़ जाता है और रातों-रात सब कुछ बदल जाता है बम दमकू और सायरन की गूंज के बीच भारतीय छात्र बकरों में छिपाने को मजबूर हो जाते हैं जब भारत सरकार को इस मामले का पता चला तो अपने भारतीयों नागरिकों के लिए उन्होंने खुद प्रस्तावना की उनको वापस भारत बुलाया जाए कहानी मुख्य रूप से उन छात्रों के संघर्ष और दिल्ली में बैठे सरकारी अधिकारियों की कूटनीतिक प्रयासों के इर्द-गिर्द घूमती हैं फिल्म दिखाई है कि कैसे कर्क राशि ठंड भोजन की कमी और चारों तरफ से गिरती मिसाइल के बीच छात्रों को सुरक्षित सीमा तक पहुंचाया गया या केवल एक
असल घटना क्या था ऑपरेशन गंगा
फिल्म ऑपरेशन AMG उसका नाम भले ही थोड़ा पूरी तरह से गंगा पर आधारित फरवरी 2022 परीक्षा कब 20,000 भारतीय छात्र फंसे थे भारत सरकार ने पोलैंड हंगरी स्लोवाकिया और रोमानिया के साथ कूटनीतिक तालमेल बिठाकर इन छात्रों को निकाला गया वायु सेवा और निजी एयरलाइंस में मिलकर दर्जनों उड़ने भारी या मिशन दुनिया के सबसे सफल इवैक्युएशन ऑपरेशन में से एक माना जाता है भारतीय छात्र यूक्रेन में फंसे काफी परेशान हो रहे हैं
कलाकारा का प्रदर्शन Cast & Performance
फिल्म की जान इसके कलाकार फिल्म में कोई बहुत बड़ा सुपरस्टार ना होने के वजूद कलाकारों ने अपनी सादगी और मेहनत से जान फूंक दी है छात्रों की भूमिका फिल्म में छात्रों का किरदार निभाने वाले युवकों ने डार चिंता और घर वापसी की उम्मीद को बखूबी चेहरे पर उतारा है उनकी आंखों में मौत का खौफ और फिर तिरंगे को देखकर मिलने वाली राहत दर्शकों को भावुक करती है छात्रों को उम्मीद नहीं था कि हम अपने देश वापस जा सकते हैं उन्होंने अपनी सारी उम्मीद छोड़ दी थी कि हम भारत भी जाएंगे लेकिन भारत सरकार ने अधिकारियों की भूमिका सरकारी प्रतिनिधियों और कूटनीतिज्ञो के रोल में कलाकारों ने संयम और गंभीरता दिखाई है जो एक हाई प्रोफाइल मिशन के लिए जरूरी होती है
निर्देशन और पटकथा (Direction & Screenplay)
ध्रुव लाठर का निर्देशन प्रभावशाली है उन्होंने फिल्म को अनावश्यक मेलोड्रामा से बचकर रियलिस्टिक रखने की कोशिश की है पटकथा फिल्म की गति फेस तेज है जो दर्शकों को बांधकर रखती है युद्ध के मैदान से लेकर बंद कमरों में होने वाली बैठकों तक शिफ्टिंग बहुत स्मूथ है डिटेलिंग हॉस्टल लो के हालात बॉर्डर पर लगने वाली लंबी लाइनें और पासपोर्ट की समस्या जैसे छोटे-छोटे पहलुओं पर बारीक काम किया गया है