भारतीय उच्च शिक्षा का नया संविधान: UGC के बदलते कानून और उनके दूरगामी लाभ

भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां पारंपरिक रट्टा मार पद्धति को अलविदा कह कर लचीली और वैश्विक शिक्षा की न्यू रखी जा रही है विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पिछले कुछ वर्षों में अपने नियमों में जो अमूल चूल परिवर्तन के हैं हुए केवल गाजी बदलाव नहीं है बल्कि आने वाली वीडियो की भविष्य को सुरक्षित करने की एक नई रूपरेखा है इन नियमों का सख्ती से लागू होना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है आज के समय में बहुत ही ज्यादा यूजीसी का लागू होना बेहद ज्यादा जरूरी है क्योंकि बच्चे शिक्षा और सही से प्राप्त नहीं कर पाते हैं काफी मेहनत करते हैं पर उन पर काफी ज्यादा जातिवाद का दोस्त दिया जाता है कि छोटे एससी ओबीसी एडी के लोग अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें इसके लिए यूजीसी कानून को लाया गया है पर कुछ लोग जनरल कैटेगरी के लोग इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि छोटे लोग पढ़ लिखकर एक अच्छा इंसान बन जाएंगे तो जनरल कैटेगरी वाले लोगों को काफी परेशानी का डर है पर ऐसा कुछ नहीं है छोटे लोग कभी भी किसी को नहीं परेशान करते हैं
UGC के नए नियमों का मुख्य आधार: NEP 2020
UGC द्वारा प्रस्तावित यह कानून राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्षण को प्राप्त करने के लिए बनाए गए हैं इनका मुख्य उद्देश्य है भारतीय छात्रों को एक ऐसा मंच देना है जहां वे अपने रुचि के अनुसार विषय चुन सकें और दुनिया के किसी भी विकसित देश के छात्र के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें अपना देश का नाम अपने समाज का नाम अपने गांव का नाम रोशन कर सकें काफी एजुकेटेड होकर के आगे अपना समाज को अपने देश को काफी मजबूत बना सके
प्रमुख क्रांतिकारी बदलाव और उनके प्रभाव
पुराने कानून के तहत यदि कोई छात्र अपनी वित्तीय या पारिवारिक समस्याओं के कारण एजुकेशन के दूसरे साल में पढ़ाई छोड़ देता है तो उसे कोई डिग्री नहीं मिलती और उसकी मेहनत बेकार चली जाती थी लेकिन नए UGC नियमों के तहत
- 1 साल पूरा होने पर सर्टिफिकेट मिलेगी
- 2 साल पर डिप्लोमा मिलेगी
- 3 साल पर डिग्री मिलेगी
- 4 साल पर रिसर्च के साथ ऑनर्स डिग्री मिलेगी यह नियम छात्रों को मानसिक तनाव से मुक्त करता है और उन्हें अपने शर्तों पर पढ़ने की आजादी देता है
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिटस (ABC) का उदय

यह एक डिजिटल लॉकर की तरह है जहां छात्रा के द्वारा अर्जित किए गए क्रेडिट्स अंक सुरक्षित रहेंगे यदि कोई छात्र एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में ट्रांसफर लेना चाहता है तो उसके क्रेडिट्स साथ चलेंगे इसे शिक्षा में निरंतर आएगी और ड्राॅपआउट होने का डर खत्म हो जाएगा इसके चलते हुए छात्र-छात्राओं के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है छात्र जो जितना मेहनत करेगा उसको उतना ही योग्य माना जाएगा इस यूजीसी कानून की काफी ज्यादा बहुत ही छात्रों को मजबूत करती है छात्रों के लिए बहुत बड़ा एक कानून है उनको एक विश्वास मिल गया है कि हम जितना पढ़ाई करेंगे उतना तो हमें उसका सर्टिफिकेट शामिल ही जाएगा इसके चलते छात्र-छात्राओं के मन में खुशी की लहर उठी है



